Saturday, May 16, 2026
Homeव्यापारApp Transport Workers Strike Feb 7

App Transport Workers Strike Feb 7

-


नई दिल्ली5 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

देश भर में शनिवार को ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (गिग वर्कर्स) की हड़ताल है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) से जुड़े ड्राइवरों और वर्कर्स ने इस हड़ताल की घोषणा की है।

यह घटती कमाई, बढ़ते शोषण और सरकार की तरफ से न्यूनतम बेस फेयर तय न किए जाने के विरोध में किया जा रहा है। हड़ताल में ओला, उबर, रैपिडो, पोर्टर समेत अन्य ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट सर्विस से जुड़े ड्राइवर और वर्कर्स शामिल होंगे। यूनियनों का कहना है कि इस दौरान सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

बेस फेयर तय न होने पर नाराजगी

यूनियनों के मुताबिक, मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस-2025 मौजूद होने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों ने अब तक न्यूनतम बेस फेयर को नोटिफाई नहीं किया है। इसका फायदा उठाकर एग्रीगेटर कंपनियां मनमाने तरीके से किराया तय कर रही हैं।

यूनियनों का आरोप है कि कंपनियां किराया कम करती जा रही हैं, जबकि सारा ऑपरेशनल जोखिम ड्राइवरों पर डाल दिया गया है। इससे काम के घंटे बढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी कमाई लगातार घट रही है।

TGPWU के संस्थापक अध्यक्ष, IFAT के को-फाउंडर और नेशनल जनरल सेक्रेटरी शेख सल्लाउद्दीन ने कहा कि गाइडलाइंस-2025 में किराया तय करने से पहले मान्यता प्राप्त यूनियनों से परामर्श अनिवार्य है, लेकिन सरकारों की निष्क्रियता के चलते प्लेटफॉर्म कंपनियां शोषण बढ़ा रही हैं।

गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर को हड़ताल की थी

इससे पहले IFAT से जुड़े डिलीवरी वर्कर्स ने 31 दिसंबर 2025 को भी देशव्यापी हड़ताल की थी। उस समय 10 मिनट में डिलीवरी, कम वेतन, खराब कामकाजी हालात और सामाजिक सुरक्षा के अभाव को लेकर विरोध किया गया था।

इसमें स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, जेप्टो जैसी कंपनियों के राइडर्स शामिल थे। हड़ताल के बाद इन प्लेटफॉर्म्स ने ब्रांडिंग से ‘10-मिनट डिलीवरी’ का दावा हटा दिया। अब एप पर केवल ‘मिनटों में डिलीवरी’ जैसे शब्दों का उपयोग कर रहे हैं।

एक आम आदमी पार्टी (AAP) सांसद ने ANI से बातचीत में कहा कि स्विगी-जोमैटो डिलीवरी बॉय, ब्लिंकिट-जेप्टो राइडर और ओला-उबर ड्राइवरों की मेहनत से ही बड़ी कंपनियां कमाई कर रही हैं, लेकिन इस पूरे इकोसिस्टम में सबसे ज्यादा दबाव और शोषण गिग वर्कर्स पर है।

———————————

गिग वर्कर्स से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…

न बजट में कुछ-न कंपनियों ने सुनी; क्या हम रोबोट:गिग वर्कर्स बोले- एक्सीडेंट हो तो भी 12-13 घंटे काम करो; सरकार अंधी-बहरी हुई

3 फरवरी को ऑनलाइन डिलीवरी एप्स और प्लेटफॉर्म से जुड़े गिग वर्कर्स ने दिल्ली में हड़ताल की। वर्कर्स अपनी मांगें लेकर PM मोदी और अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मेमोरेंडम भी दे चुके हैं। सरकार ने 1 फरवरी को पेश बजट से पहले आए इकोनॉमिक सर्वे में माना कि ज्यादातर गिग वर्कर्स 15 हजार रुपए से भी कम कमा रहे हैं। इनके लिए पॉलिसी बननी चाहिए लेकिन बजट में कोई घोषणा नहीं हुई। पूरी खबर पढ़ें…

40% गिग वर्कर्स की कमाई ₹15 हजार से कम:इकोनॉमिक सर्वे में मिनिमम अर्निंग तय करने की सिफारिश; वेटिंग पीरियड के पैसे देने का सुझाव

संसद में 29 जनवरी को पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे में गिग इकोनॉमी पर चिंता जताई गई है। सर्वे के मुताबिक, भारत में लगभग 40% गिग वर्कर्स यानी फूड डिलीवरी, क्विक कॉमर्स और अन्य प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मचारियों की महीने की कमाई 15 हजार रुपए से भी कम है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Related articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest posts