Why Shashi Tharoor to lead all party delegation: अप्रैल 2025 पहलगाम की वादियों अचानक से अशांत हो गई. पाकिस्तान की ओर से आए दरिंदे आतंकियों ने 26 लोगों का नरसंहार कर दिया. पर्यटकों के चीत्कार और आतंकियों की बर्बरता ने देश को झकझोर कर रख दिया. उस खौफनाक मंजर के बाद एक नाम गूंजा जो पहले शांत था, लेकिन अब आग उगल रहा था. वह नाम था शशि थरूर… वही थरूर जिनकी बोलने की कला कांग्रेस के गलियारों में भी अक्सर असहज कर देती है. वही थरूर जिन्हें उनकी ही पार्टी ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑल पार्टी डेलिगेशन यानी ‘टीम इंडिया’ के लिए नजरअंदाज कर दिया. फिर भी प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें चुना एक ऐसी कूटनीतिक टीम का नेतृत्व करने के लिए जो पाकिस्तान के खिलाफ भारत की आवाज को दुनिया के पांच सबसे शक्तिशाली राजधानियों तक ले जाएगी. यह चयन सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं बल्कि एक रहस्यमयी समीकरण का हिस्सा था जिसमें अतीत के घाव और वर्तमान की कूटनीति गुथी हुई थी.
कांग्रेस ने अपनी ओर से आनंद शर्मा, गौरव गोगोई, डॉ. सैयद नसीर हुसैन और राजा बरार के नाम भेजे थे, लेकिन खेल पलटा. किरन रिजिजू का फोन और राहुल गांधी की लिस्ट सब धरे के धरे रह गए. पीएम मोदी ने थरूर को चुना एक ऐसे व्यक्ति को जो अपनी ही पार्टी के भीतर हाशिए पर था. लेकिन विदेशी मंचों पर भारत का मुखर चेहरा बन सकता था. पहलगाम नरसंहार के बाद थरूर के बदले तेवर, अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत का दमदार प्रतिनिधित्व, पाकिस्तान के खिलाफ उनकी तीखी आलोचना और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बढ़ती नजदीकी ये सब मिलकर एक ऐसी कहानी बुनते हैं जो ‘टीम इंडिया’ के इस रहस्यमयी कप्तान के चयन को एक नया आयाम देती है. यह सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं बल्कि एक कूटनीतिक ‘मास्टरस्ट्रोक’ था.
वहीं शशि थरूर ने अपने चयन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मुझे बुलाया गया मुझसे सेवा देने का आग्रह किया गया और मैंने इसे एक सम्मान के रूप में स्वीकार किया.” कांग्रेस द्वारा यह कहे जाने पर कि उनका नाम सूची में नहीं था थरूर ने कहा, “यह सरकार और पार्टी के बीच का मामला हो सकता है मुझे इसकी जानकारी नहीं है. जब मुझे बुलाया गया मैंने अपनी पार्टी को इसकी जानकारी दे दी थी.”
सात प्रतिनिधिमंडलों में एक की अगुवाई कांग्रेस सांसद शशि थरूर करेंगे. (फोटो PTI)
शशि थरूर: क्यों बने ‘टीम इंडिया’ के कप्तान?
| फैक्ट | कारण | विवरण |
|---|---|---|
| 1. पहलगाम का बदला रुख | नरसंहार के बाद शशि थरूर का तेवर बदला | पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर मुखर बयान, भारत की संप्रभुता की खुलकर वकालत |
| 2. अंतरराष्ट्रीय मंच पर दमदार आवाज | थरूर की भाषा और कूटनीति की ताकत | अंग्रेजी पर मजबूत पकड़, पश्चिमी मीडिया और डिप्लोमैटिक सर्कल्स में प्रभावशाली संवाद |
| 3. पाकिस्तान के खिलाफ तीखे बयान | पाकिस्तान की दोहरी नीति पर करारा हमला | UN और ग्लोबल प्लेटफॉर्म्स पर आतंक के खिलाफ थरूर की सीधी ललकार |
| 4. मोदी से बढ़ती नजदीकी | द्विदलीय सहयोग की मिसाल | राष्ट्रीय मुद्दों पर समर्थन, पीएम मोदी का भरोसा, कांग्रेस की अनदेखी के बावजूद नेतृत्व |
| 5. अनुभव और वैश्विक दृष्टि | संयुक्त राष्ट्र से लेकर संसद तक | विदेश नीति की समझ, विश्व पटल पर भारत की बात रखने का अनुभव |
शशि थरूर के चयन के 5 फैक्टर विस्तार से:
पहलगाम का बदला रुख: अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने शशि थरूर के राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया. इस घटना से पहले उनकी छवि एक शांत और संयमित राजनीतिज्ञ की थी. लेकिन इस हमले के बाद उन्होंने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत और मुखर रुख अपनाया. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की निंदा की और भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाई. यह बदलाव उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर एक विश्वसनीय आवाज के रूप में स्थापित करता है.
अंतरराष्ट्रीय मंच पर दमदार आवाज: शशि थरूर की बोलने की कला और कूटनीतिक कौशल उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक आदर्श विकल्प बनाते हैं. उनकी अंग्रेजी भाषा पर पकड़ और पश्चिमी दर्शकों की समझ उन्हें वैश्विक मीडिया में भारत की स्थिति को स्पष्ट करने में सक्षम बनाती है. वे पाकिस्तान द्वारा फैलाई गई फेक न्यूज का दमदार ढंग से मुकाबला कर सकते हैं और भारत के पक्ष को स्पष्ट रूप से रख सकते हैं.
पाकिस्तान के खिलाफ सख्त बयान: शशि थरूर ने पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के समर्थन की लगातार आलोचना की है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के दोहरे रवैये को उजागर किया है और आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया है. उनके मजबूत बयानों ने उन्हें राष्ट्रवादी आवाजों के बीच सम्मान दिलाया है और उन्हें सरकार के साथ खड़े होने वाले लोगों में शुमार कर दिया.
मोदी से बढ़ती नजदीकी: हाल के दिनों में शशि थरूर और प्रधानमंत्री मोदी के बीच संबंधों में सुधार हुआ है. यह केरल में हाल में भी दिख चुका है जब पीएम मोदी शशि थरूर से मंच पर ही रुककर बात करने लगे थे. अपने भाषण में उन्होंने कहा था आज कई लोगों को नींद नहीं आएगी. थरूर ने राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सरकार का समर्थन किया है और सार्वजनिक रूप से मोदी की कुछ नीतियों की प्रशंसा की है. बढ़ती नजदीकियां और राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सहयोग को दर्शाती है. यह एक संकेत है कि पीएम मोदी राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष को साथ लेकर चलना चाहते हैं.
अनुभव और ज्ञान: शशि थरूर का व्यापक राजनीतिक अनुभव और अंतरराष्ट्रीय मामलों की गहरी समझ उन्हें ‘टीम इंडिया’ के लिए एक मूल्यवान सदस्य बनाती है. संयुक्त राष्ट्र में उनके पूर्व अनुभव, उनकी बोलने की कला और उनकी व्यापक वैश्विक दृष्टि ने उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ भारत के रुख को स्पष्ट करने के लिए एक शानदार विकल्प बना दिया है. उनकी बौद्धिक क्षमता उन्हें इस मिशन के लिए एक मजबूत नेता बनाती है.

