नई दिल्ली. लोकसभा सांसद शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने शनिवार को साफ शब्दों में कह दिया कि कांग्रेस को अपने विकल्प चुनने का पूरा अधिकार है और जैसा वह चाहती है वैसा करे. दरअसल, सरकार ने विदेश मामलों पर संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष थरूर को आतंकवाद को समर्थन देने के लिए पाकिस्तान के खिलाफ भारत का रुख रखने के वास्ते विदेश जाने वाले सात बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक का नेतृत्व करने के लिए नामित किया है.
वहीं, कांग्रेस की तरफ से पाक स्पॉन्सर आतंकवाद पर भारत का रुख रखने के लिए जिन चार नेताओं को नॉमिनेट किया गया है, उनमें शशि थरूर का नाम शामिल नहीं है. पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, लोकसभा में पार्टी के उपनेता गौरव गोगोई, राज्य सभा सदस्य सैयद नासिर हुसैन और लोकसभा सदस्य अमरिंदर सिंह राजा वडिंग का नाम शामिल किया है.
पार्टी द्वारा नकारे जाने के बावजूद सरकार द्वारा उन्हें शामिल किए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए थरूर ने कहा कि सरकार ने स्पष्ट रूप से अपने विवेक से निर्णय लिया है कि भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए कौन उपयुक्त है. उन्होंने कहा कि वह अपनी भागीदारी को राष्ट्रीय कर्तव्य के रूप में देखते हैं, न कि पार्टी की राजनीति के रूप में.
थरूर ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, “पार्टी को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है. स्पष्ट रूप से, यह एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल है, इसलिए सरकार की अपनी राय है कि उन्हें कौन सही और जरूरी लगता है. मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि सरकार और मेरी पार्टी के बीच किसी और संपर्क के बारे में मुझे जानकारी नहीं है और मुझे लगता है कि आपको संबंधित लोगों से पूछना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “जहां तक मेरा सवाल है, इन मुद्दों से निपटने वाली संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के तौर पर मुझसे पूछा गया, लेकिन इसलिए भी क्योंकि मंत्री ने बहुत विनम्रता से अंतरराष्ट्रीय मामलों में मेरे पिछले वर्षों के व्यक्तिगत अनुभव और उस अनुभव और ऐसे ज्ञान की आवश्यकता के बारे में बात की, जो इस समय राष्ट्र की सेवा में लगाया जा सकता है.” शशि थरूर ने कहा कि उनकी सेवा हमेशा देश के लिए उपलब्ध है और जब भी देश को उनकी आवश्यकता होगी, वे आगे आने में कभी संकोच नहीं करेंगे.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे क्षणों में राजनीति से परे एकता की जरूरत होती है. लोकसभा सांसद ने कहा, “निश्चित रूप से, जब मेरे देश को मेरी सेवाओं की जरूरत होती है, तो मैं उपलब्ध हूं और मैं अपने देश के लिए उपलब्ध हूं. मेरे विचार से, इसका पार्टी राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. इसका संबंध हाल के दिनों में हमारे देश के साथ हुई घटनाओं और हमारे लिए एकजुट मोर्चा पेश करने की आवश्यकता से है.”
थरूर ने याद किया कि 2008 के आतंकवादी हमलों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसी तरह का प्रतिनिधिमंडल संपर्क अभियान चलाया था. उन्होंने इसे संकट के समय में राष्ट्रीय एकता का प्रतिबिंब बताया. थरूर ने कहा, “जैसा कि मैं कहता हूं, और मैं गलत भी हो सकता हूं, क्योंकि मैं उस समय न तो भारत में था और न ही भारतीय राजनीति में, 2008 के आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में इसी तरह के प्रतिनिधिमंडल भेजे गए थे, इसलिए यह अभूतपूर्व नहीं है. यह अनिवार्य रूप से कुछ ऐसा है जो मेरे विचार से ऐसे समय में राष्ट्रीय एकता का एक अच्छा प्रतिबिंब है जब एकता महत्वपूर्ण है.”

