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Viral wedding: गुजरात के नवसारी जिले में एक दूल्हा 19 मई को अपनी दो पत्नियों से एक ही मंडप में शादी करेगा. दोनों महिलाएं पहले से उसके साथ लिव-इन में रह रही हैं और उनके बच्चे भी हैं.
एक दूल्हा दो दुल्हनों की शादी
गुजरात के नवसारी जिले से एक चौंकाने वाली लेकिन दिलचस्प खबर सामने आई है. यहां एक शादी का कंकोत्री सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें दूल्हे के साथ दो दुल्हनों के नाम छपे हुए हैं. यह देखकर लोग हैरान हैं, तो कई लोग दूल्हे को दो शादियों की शुभकामनाएं भी दे रहे हैं. यह शादी 19 मई को वांसदा तालुका के खानपुर गांव में होने जा रही है.
आदिवासी परंपरा से जुड़ी है यह शादी
यह मामला सिर्फ हैरान करने वाला नहीं, बल्कि एक खास परंपरा से भी जुड़ा हुआ है. आदिवासी समाज में अक्सर युवक और युवतियां शादी से पहले लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं. वे एक-दूसरे के साथ पति-पत्नी की तरह रहते हैं और जब उनकी आर्थिक स्थिति ठीक हो जाती है, तब वे समाज के सामने औपचारिक रूप से शादी करते हैं. इसी परंपरा को निभाते हुए मेघराज देशमुख अब अपनी दोनों पत्नियों से औपचारिक शादी करने जा रहे हैं.
कौन हैं मेघराज देशमुख और उनकी पत्नियां
खानपुर गांव के 36 वर्षीय मेघराज देशमुख, गांव की पारसी बस्ती में रहते हैं. वे दो महिलाओं – काजलबेन और रेखाबेन – के साथ लंबे समय से लिव-इन में रह रहे हैं. काजलबेन खांडा गांव के जयहिंदभाई की बेटी हैं और रेखाबेन केलिया गांव के मगनभाई की बेटी. दोनों महिलाएं मेघराज के साथ वर्षों से रह रही हैं और उनके साथ उनके तीन बच्चे भी हैं.
बच्चों के साथ शादी में शामिल होंगी दोनों पत्नियां
इस अनोखी शादी में खास बात यह है कि मेघराज देशमुख के तीनों बच्चे – पहली पत्नी से एक बेटा और एक बेटी, और दूसरी पत्नी से एक बेटा – इस शादी में शामिल होंगे. मेघराज कहते हैं, “मैंने दोनों पत्नियों से प्रेम विवाह किया है और उनके परिवारों को भी स्वीकार कर लिया है. इसलिए अब मैं उनके साथ एक ही मंडप में शादी कर रहा हूं.”
पूरा राज्य कर रहा है इस शादी की चर्चा
मेघराज देशमुख की यह शादी अब केवल खानपुर गांव तक सीमित नहीं रही. अब तो पूरे वांसदा और आसपास के जिलों से लोग इस शादी के बारे में जानना चाह रहे हैं. मेघराज को लगातार फोन आ रहे हैं, लोग पूछ रहे हैं कि आखिर यह सब कैसे हो रहा है. सोशल मीडिया पर भी इस शादी को लेकर बहस छिड़ी हुई है – कुछ लोग इसे साहसिक कदम बता रहे हैं, तो कुछ इसे परंपरा की सुंदरता मान रहे हैं.

