Saturday, May 16, 2026
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शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों ने ₹22,530 करोड़ निकाले:जनवरी के पहले 15 दिन में बिकवाली; मार्केट की हाई वैल्यूएशन और कमजोर रुपया इसका कारण

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भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का दौर नए साल में भी जारी है। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही जनवरी के पहले 15 दिनों में विदेशी निवेशकों ने घरेलू बाजार से ₹22,530 करोड़ के शेयर बेच दिए हैं।पिछले हफ्ते केवल चार कारोबारी सत्रों में ही विदेशी निवेशकों ने ₹14,266 करोड़ की बिकवाली की। छुट्टी की वजह से पिछला हफ्ता छोटा था, इसके बावजूद बिकवाली की रफ्तार बहुत तेज रही। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्लोबल लेवल पर बढ़ते तनाव और भारत में शेयरों की ऊंची वैल्यूएशन के कारण विदेशी निवेशक अपना पैसा निकाल रहे हैं। आईटी सेक्टर के अच्छे नतीजों असर नहीं बड़ी आईटी कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं। इसके बावजूद बाजार में तेजी नहीं लौट पा रही है। रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा के मुताबिक, टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताएं और दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव आईटी कंपनियों के अच्छे नतीजों पर भारी पड़ रहे हैं। निवेशकों में इस बात को लेकर डर है कि आने वाले समय में ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी कैसी रहेगी, इसलिए वे मुनाफावसूली कर रहे हैं। 2025 में हुई थी ₹1.66 लाख करोड़ की रिकॉर्ड बिकवाली दिसंबर 2025 में विदेशी निवेशकों ने ₹22,611 करोड़ के शेयर बेचे थे। अगर पूरे साल 2025 की बात करें, तो विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से कुल ₹1,66,286 करोड़ की निकासी की है। यह बाजार के लिए एक बड़ा दबाव बना हुआ है, जिसकी वजह से पिछले कुछ महीनों से सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पैसा निकालने की 3 बड़ी वजहें मार्केट एक्सपर्ट वी के विजयकुमार ने विदेशी निवेशकों के इस व्यवहार के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं: एक्सपर्ट्स की सावधानी से निवेश करने की सलाह सावधानी से करें निवेश रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा ने निवेशकों को सलाह दी है कि इस समय बाजार का माहौल मिला-जुला है। ग्लोबल और घरेलू दोनों मोर्चों पर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को बहुत ज्यादा उधार लेकर या बड़े दांव लगाने से बचना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस समय केवल अच्छी क्वालिटी वाले ‘लार्ज-कैप’ और बड़े ‘मिडकैप’ शेयरों पर ही ध्यान देना चाहिए। खासकर उन सेक्टर्स में निवेश करना सुरक्षित हो सकता है जहां संस्थागत निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है, जैसे- आईटी (IT), मेटल्स और चुनिंदा पीएसयू (PSU) कंपनियां।



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