Saturday, May 23, 2026
HomeदेशISRO मिशन: ISRO Mission। ISRO Mission। इसरो का मिशन हो गया फेल।...

ISRO मिशन: ISRO Mission। ISRO Mission। इसरो का मिशन हो गया फेल। तीसरे चरण में प्रेशर… आखिर कैसे फेल हुआ इसरो का 101वां मिशन, एक-एक डिटेल

-


ISRO Mission: रविवार को सवेरे-सवेरे, श्रीहरिकोटा के आसमान में इसरो के वैज्ञानिकों की आंखें टिकी हुई हैं. सभी खुशी के पल का इंतजार कर रहे थे, अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (Earth Observation Satellite) अपने कक्षा में स्थान लेने ही वाला था. पहला और दूसरा चरण सफल भी हो चुका था. मगर, अचानक से वहां मौजूद सभी के चेहरे पर मायूसी छाने लगी. रविवार को इसरो का 101वां मिशन फेल हो गया.

दरअसल, इसरो के भरोसेमंद पीएसएलवी रॉकेट पर सवार होकर ईओएस सैटेलाइट अपने कक्षा में स्थापित होने वाला था. तीसरे चरण में दबाव की समस्या आने लगी, मिशन पूरा नहीं हो सका. आखिर ये मिशन क्यों और कैसे फेल हुआ, वैज्ञानिकों ने इसकी वजह बता दी है. पीएसएलवी ने इसे लेकर सुबह के 5.59 बजे उड़ान भरी थी. पहला और दूसरा चरण सफल भी रहा, मगर यह मिशन के उद्देश्य पूरा नहीं कर पाया.

इसरो चीफ नारायणन ने कहा, “आज हमने श्रीहरिकोटा से 101वां प्रक्षेपण, पीएसएलवी-सी61 ईओएस-09 मिशन का लक्ष्य रखा था. पीएसएलवी चार चरणों वाला वाहन है और दूसरे चरण तक इसका प्रदर्शन सामान्य था. तीसरे चरण की मोटर पूरी तरह से चालू हो गई, लेकिन तीसरे चरण के कामकाज के दौरान हम एक अवलोकन देख रहे हैं और मिशन पूरा नहीं हो सका.

तीसरा चरण: एक ठोस मोटर प्रणाली

असफल लॉन्च के बाद नारायणन ने कहा, “…और मोटर दबाव–मोटर केस के चैम्बर दबाव में गिरावट आई और मिशन पूरा नहीं हो सका। हम पूरे प्रदर्शन का स्टडी कर रहे हैं, हम जल्द से जल्द वापस आएंगे.” EOS-09, 2022 में लॉन्च किए जाने वाले EOS-04 के समान एक रिपीट सैटेलाइट है. इसे रिमोट सेंसिंग डेटा सिक्योर करने और अवलोकन की आवृत्ति में सुधार करने के मिशन उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है.

मिशन का पेलोड, एक सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) जो सैटेलाइट के अंदर है, दिन और रात सभी मौसम की परिस्थितियों में विभिन्न पृथ्वी अवलोकन अनुप्रयोगों के लिए चित्र प्रदान करने में सक्षम है. यह सभी मौसम, चौबीसों घंटे इमेजिंग कृषि और वानिकी निगरानी से लेकर आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन और राष्ट्रीय सुरक्षा तक के अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण है.

उद्देश्य: मलबे से मुक्त होना था

वैज्ञानिकों के अनुसार, उपग्रह को उसके प्रभावी मिशन जीवन के बाद कक्षा से बाहर निकालने के लिए पर्याप्त मात्रा में ईंधन सुरक्षित रखा गया था, ताकि इसे ऐसी कक्षा में उतारा जा सके जो दो वर्षों के भीतर इसका क्षय सुनिश्चित करे, जिससे मिशन को मलबा-मुक्त बनाया जा सके.

सीजफायर के बाद भारत का सर्विलांस बढ़ता

अगर यह पृथ्वी की सतह से 500 किलोमीटर ऊपर कक्षा में स्थापित हो गया होता, तो पाकिस्तान के साथ सीजफायर के बाद भारत की सर्विलांस क्षमता बढ़ जाता. पीएसएलवी की विफलता की जांच की जा रही है. इसने चंद्रयान और मंगलयान जैसे मिशनों को लॉन्च किया है. यह इसरो का एक विश्वसनीय रॉकेट माना जाता है. इसके फेलियर पर रिपोर्ट एक हफ्ते के बाद आ सकती है.



Source link

Related articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest posts