Saturday, May 23, 2026
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‘मेरी जगह कोई और होता हो…’ CJI बनकर पहली बार महाराष्ट्र पहुंचे जस्टिस गवई, अफसरों की हरकत देख लगा दी क्लास

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जस्टिस बीआर गवई भारत का प्रधान न्यायाधीश (CJI) बनने के बाद रविवार को महाराष्ट्र के अपने पहले दौरे पर पहुंचे. हालांकि इस दौरान उन्होंने राज्य के शीर्ष अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर नाराजगी जताई. उन्होंने रविवार को कहा कि राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और मुंबई पुलिस आयुक्त में से कोई भी उन्हें स्वागत करने नहीं आया, जो कि सोचने वाली बात है.

CJI गवई ने यह बात बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा की तरफ आयोजित सम्मान समारोह में कही. उन्होंने 14 मई को भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी और यह मुंबई का उनका पहला दौरा था.

‘प्रोटोकॉल नहीं, सम्मान का मामला’

बार काउंसिल के समारोह में बोलते हुए CJI गवई ने कहा कि वह प्रोटोकॉल चूक जैसी छोटी बातों पर जोर नहीं देना चाहते, लेकिन यह जरूर कहना चाहेंगे कि लोकतंत्र के तीनों स्तंभ विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका बराबर हैं और उन्हें एक-दूसरे को सम्मान देना चाहिए.

उन्होंने कहा,

‘जब कोई व्यक्ति जो यहीं का है, मुख्य न्यायाधीश बनकर पहली बार राज्य में आया है और अगर राज्य के मुख्य सचिव, DGP या मुंबई पुलिस आयुक्त नहीं आना चाहते तो उन्हें खुद सोचना चाहिए कि यह सही था या नहीं.’

गवई ने यह भी कहा कि वह यह बात इसलिए कह रहे हैं ताकि लोगों को इसके बारे में जानकारी हो, भले ही वह इसे कोई बड़ी बात नहीं मानते.

फिर उन्होंने थोड़े मजाकिया अंदाज़ में कहा,

‘अगर मेरी जगह कोई और होता, तो शायद संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर लिया गया होता.’

अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को यह शक्ति देता है कि वह किसी भी मामले में पूरी तरह से न्याय देने के लिए जरूरी आदेश दे सके और जरूरत पड़ने पर किसी व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित कर सके.

फिर पहुंचे सारे अधिकारी…

CJI गवई के इस बयान के कुछ घंटों बाद, जब वह मुंबई के दादर स्थित चैत्यभूमि पहुंचे और डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी, तब मुख्य सचिव सुजाता सौनिक, DGP रश्मि शुक्ला, और मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन्द्र भारती वहां मौजूद थे.

यह दौरा सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान की दृष्टि से अहम माना जा रहा है. CJI गवई ने यह भी साफ कर दिया कि वे व्यक्तिगत तौर पर किसी से नाराज़ नहीं हैं, बल्कि यह एक सिद्धांत और सम्मान का विषय है.



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