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CJI BR Gavai News: भारत में न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकारों को लेकर अक्सर ही सवाल उठते रहते हैं. सीजेआई जस्टिस बीआर गवई ने अब इस मामले में बड़ी बात कही है.
CJI जस्टिस बीआर गवई ने न्यायिक सक्रियत यानी ज्यूडिशियल एक्टिविज्म पर बड़ी बात कही है. (फोटो: पीटीआई)
हाइलाइट्स
- सीजेआई बीआर गवई ने ज्यूडिशियल एक्टिविज्म पर बड़ी बात कही है
- न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकारों पर भी रखी अपनी राय
- भारत में अक्सर कोर्ट और एग्जीक्यूटिव के राइट्स पर होती है बहस
CJI BR Gavai News: देश में कई बार ऐसे मौके आते हैं, जब न्यायपालिका और कार्यपालिका के अधिकारों की रेखा धुंधली से हो जाती है. तमिलनाडु के गवर्नर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर काफी बहस हुई. अब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई ने इस मसले पर अपनी बेबाक राय रखी है. एक कार्यक्रम में बोलते हुए सीजेआई गवई ने कहा कि ज्यूडिशियल एक्टिविज्म (न्यायिक सक्रियता) को ज्यूडिशियल टेररिज्म (न्यायिक आतंकवाद) में परिवर्तित नहीं होना चाहिए. सीजेआई गवई ने आगे कहा कि कई बार लोग अपनी सीमा को लांघने की कोशिश करते हुए उस क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश करते हैं, जहां आमतौर पर ज्यूडिशियरी एंटर नहीं करती है. सीजेआई बीआर गवई ने एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड तन्वी दुबे की ओर से आयोजित ‘ऑक्सफोर्ड यूनियन’ कार्यक्रम में ये बातें कही हैं.

