Friday, June 5, 2026
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अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्र: बिहार की मिट्टी से विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक तक,नीति निर्माण से वैश्विक मंच तक का सफर ।

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नीलकंठ मिश्र आज भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे प्रभावशाली विश्लेषकों में से एक हैं। Axis Bank के Chief Economist से लेकर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद तक, उनका सफर नीतिगत समझ और बाजार के अनुभव का अनोखा संगम है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
नीलकंठ मिश्र का जन्म पटना, बिहार में हुआ। स्कूली शिक्षा उन्होंने DPS बोकारो से 1993 में पूरी की। बचपन से ही गणित और विज्ञान में गहरी रुचि थी। इसी लगन का नतीजा था कि 1993 में IIT-JEE में उन्होंने पूरे देश में चौथी रैंक हासिल की। IIT कानपुर से Computer Science में B.Tech किया और वहाँ से स्वर्ण पदक भी जीता। बाद में IIT कानपुर ने उन्हें प्रतिष्ठित पूर्व छात्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया।

करियर की शुरुआत: निवेश बैंकिंग से पहचान
IIT के बाद नीलकंठ ने निवेश बैंकिंग की दुनिया चुनी। उन्होंने Credit Suisse जॉइन किया और जल्द ही India Equity Strategist बने। 15 साल से ज्यादा समय तक उन्होंने भारतीय बाजारों का विश्लेषण किया। संस्थागत निवेशकों के सर्वे में उन्हें लगातार भारत का सर्वश्रेष्ठ विश्लेषक माना गया। उनकी खासियत थी जटिल आर्थिक रुझानों को सरल भाषा में समझाना।

उन्होंने 2008 की मंदी, अमेरिकी फेड की नीतियों, और भारत के राजकोषीय घाटे पर सटीक भविष्यवाणियां कीं। जैसे उन्होंने बताया था कि अमेरिकी राजकोषीय प्रोत्साहन अल्पावधि में विकास देगा, पर लंबी अवधि में सुस्ती लाएगा – जो सही साबित हुआ।

Axis Bank और नीतिगत भूमिका
मार्च 2023 में नीलकंठ मिश्र ने Credit Suisse छोड़कर Axis Bank जॉइन किया। यहाँ वे Chief Economist और Head of Global Research बने। बैंक के बोर्ड में भी शामिल हैं।

इसके साथ ही सरकार ने उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां दीं। अक्टूबर 2019 में वे प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद EAC-PM के अंशकालिक सदस्य बने। UIDAI के पार्ट-टाइम चेयरपर्सन भी नियुक्त किए गए। TRAI में भी अंशकालिक सदस्य हैं। 15वें और 16वें वित्त आयोग, भारत सेमीकंडक्टर मिशन को भी सलाह दी। CII की आर्थिक मामलों की परिषद के सदस्य भी हैं।

सोच और विश्लेषण का तरीका
नीलकंठ मिश्र की खासियत है डेटा और जमीनी हकीकत को जोड़ना। वे मानते हैं कि भारत की वृद्धि सिर्फ GDP के आंकड़ों से नहीं, बल्कि रोजगार, कौशल और डिजिटलीकरण से तय होगी। वे अक्सर कहते हैं कि नीतियां तब काम करती हैं जब वे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें।

उनकी भविष्यवाणियां दो कारणों से अलग होती हैं: पहला, वे वैश्विक रुझानों को भारत के संदर्भ में देखते हैं। दूसरा, वे लंबी अवधि का नजरिया रखते हैं। निवेशकों के लिए उनके नोट्स “must read” माने जाते हैं।

व्यक्तिगत रुचियां
अर्थशास्त्र से हटकर नीलकंठ मिश्र को वन्यजीव देखना पसंद है। अंटार्कटिका उनकी पसंदीदा छुट्टी की जगह है। एड योंग की किताब ‘An Immense World’ उन्हें प्रिय है। अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्रियों में जॉन कोचरन को पसंद करते हैं।

विवाद और आलोचना
सरकार के साथ नजदीकी के कारण कुछ लोग उन्हें “सरकारी अर्थशास्त्री” कहते हैं। पर उनके समर्थक मानते हैं कि नीति निर्माण में बाजार के व्यक्ति का होना जरूरी है। वे खुलकर अपनी राय रखते हैं, चाहे वो महंगाई पर हो या रोजगार पर।

भारत के लिए महत्व
आज जब भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है, नीलकंठ मिश्र जैसे विश्लेषकों की भूमिका अहम है। वे सरकार, बैंक और बाजार के बीच पुल का काम करते हैं। UIDAI चेयरमैन के रूप में वे डिजिटल इंडिया को आगे बढ़ा रहे हैं। EAC-PM में वे प्रधानमंत्री को सीधे आर्थिक सलाह देते हैं।

नीलकंठ मिश्र का सफर बताता है कि कैसे एक IIT इंजीनियर नीति निर्माण का चेहरा बन सकता है। बिहार के छोटे शहर से निकलकर वैश्विक मंच तक का उनका रास्ता युवाओं के लिए प्रेरणा है। उनकी कहानी यही सिखाती है – डेटा में महारत और जमीन से जुड़ाव, यही अच्छे अर्थशास्त्री की पहचान है।

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