
नई दिल्ली, 4 जून 2026
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 10 जून 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है, इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित करेंगे जिसे तोड़ना आने वाले दशकों तक बहुत मुश्किल होगा। पीएम मोदी लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले देश के पहले नेता बन जाएंगे। इस मामले में वह भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के 64 साल पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे।
क्या है पूरा गणित ?
पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के पहले आम चुनाव के बाद 13 मई 1952 को लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री बने थे। 27 मई 1964 को अपने निधन तक वह लगातार इस पद पर रहे। इस दौरान उनका कार्यकाल 4,398 दिनों का रहा।
वहीं नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। 9 जून 2026 को उनके लगातार कार्यकाल के भी 4,397 दिन पूरे हो जाएंगे, जो नेहरू के बराबर होगा। इसके ठीक अगले दिन, यानी 10 जून 2026 को नरेंद्र मोदी का कार्यकाल 4,399 दिनों का हो जाएगा। इसी के साथ वह नेहरू को पीछे छोड़ते हुए लगातार सबसे अधिक समय तक सेवा देने वाले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रधानमंत्री बन जाएंगे।
नेहरू का कौन सा रिकॉर्ड नहीं टूटेगा ?
हालांकि, कुल कार्यकाल के मामले में पंडित नेहरू का रिकॉर्ड अभी भी कायम रहेगा। नेहरू 15 अगस्त 1947 को आजादी के दिन से प्रधानमंत्री बने थे, जबकि पहला चुनाव 1952 में हुआ था। आजादी से लेकर 27 मई 1964 तक उनका कुल कार्यकाल 6,131 दिनों का था। इसे तोड़ने के लिए मोदी को अभी लंबा सफर तय करना है।
पहले भी तोड़ चुके हैं कई रिकॉर्ड
यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी ने कांग्रेस काल के बड़े रिकॉर्ड तोड़े हों। जुलाई 2025 में ही उन्होंने इंदिरा गांधी के लगातार 4,077 दिनों तक पद पर रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था। इंदिरा गांधी 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक निरंतर प्रधानमंत्री रहीं थीं।
इसके अलावा पीएम मोदी देश के पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी नेता हैं, जिन्होंने 2014, 2019 और 2024 के आम चुनावों में लगातार तीन बार पूर्ण बहुमत या गठबंधन के साथ सत्ता में आकर इतिहास रचा है।
10 जून को होगा भव्य सम्मान
इस ऐतिहासिक मौके को खास बनाने के लिए 10 जून को दिल्ली में NDA शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री जुटेंगे। सभी मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री मोदी का भव्य सम्मान करेंगे। बीजेपी इसे ‘लोकतंत्र के नए युग’ के तौर पर प्रचारित कर रही है।
विपक्ष का रुख
पीएम मोदी अक्सर अपने भाषणों में जवाहरलाल नेहरू की आलोचना करते रहे हैं। वह तर्क देते रहे हैं कि नेहरू एक थोपा हुआ विकल्प थे और सरदार पटेल को 15 में से 12 राज्य समितियों ने मनोनीत किया था। ऐसे में नेहरू का यह रिकॉर्ड टूटना राजनीतिक तौर पर भी काफी अहम माना जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि नेहरू ने आजादी के तुरंत बाद बिना किसी अनुभव के देश को संभाला था। 1947 से 1952 तक का उनका कार्यकाल भी गिना जाना चाहिए, क्योंकि तब देश विभाजन और शरणार्थी संकट से जूझ रहा था।
क्या कहता है सियासी समीकरण ?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पीएम मोदी ने हिंदुत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मिश्रण से सियासी समीकरण को फिर से परिभाषित किया है। नेहरू और मोदी दोनों की राजनीति और व्यक्तिगत जीवन एक दूसरे से बिल्कुल अलग है, फिर भी दोनों ने अपने-अपने दौर में भारतीय राजनीति पर गहरी छाप छोड़ी है।
10 जून 2026 का दिन न सिर्फ एक आंकड़े का बदलाव होगा, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत भी करेगा। 72 साल बाद इतिहास का यह पन्ना पलटेगा, और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को लगातार सबसे लंबे समय तक चलाने वाले निर्वाचित नेता का नाम नरेंद्र मोदी हो जाएगा ।

