Sunday, May 31, 2026
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देसी S-500…THAAD, आयरन डोम से पावरफुल, राफेल और F-35 जैसे फाइटर जेट से ज्‍यादा कारगर होगा यह ब्रह्मास्‍त्र – indigenous s500 air dfence system powerful than thaad iron dome detect track intercept hypersonic missile drdo poject

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Hypersonic Missile Defence System: मॉडर्न एज वॉर में आर्मी की भूमिका जहां सीमित हुई है तो दूसरी तरफ नेवी और एयरफोर्स का रोल काफी अहम हो गया है. रूस-यूक्रेन और इजरायल-ईरान युद्ध में एयर बैटल देखने को मिला है. बा…और पढ़ें

भारत हाइपरसोनिक मिसाइल को ट्रैक करने वाला सिस्‍टम डेवलप कर रहा है. (फाइल फोटो)

हाइलाइट्स

  • DRDO हाइपरसोनिक मिसाइल को ट्रैक और इंटरसेप्‍ट करने वाला रडार सिस्‍टम डेवलप कर रहा
  • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयर ड‍िफेंस सिस्‍टम की उपयोगिता पूरी तरह से साबित हुई थी
  • भारत का देसी नया सिस्‍टम थाड और आयरना डोम जैसी वायु सुरक्षा प्रणाली से बेहतर होगी
Hypersonic Missile Defence System: दुनिया की मौजूदा हालात ने तमाम देशों को अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने पर मजबूर कर दिया है. अमेरिका से लेकर यूरोप, अफ्रीका और एशिया तक में कट‍िंग एज टेक्‍नोलॉजी वाले वेपन और डिफेंस सिस्‍टम डेवलप करने की होड़ मची हुई है. दुनिया के वैसे देश जो अपने बूते हथियार नहीं बना सकते हैं, वे इंपोर्ट कर रहे हैं. इसके लिए डिफेंस बजट में काफी वृद्धि‍ की जा रही है. अन्‍य देशों की बात तो छोड़ दी जाए धरती का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका भी अपनी रक्षा प्रणाली को अपग्रेड करने में जुटा है. डोनाल्‍ड ट्रंप की सरकार ने 175 अरब डॉलर (₹1505115 करोड़) की लागत से अल्‍ट्रा मॉडर्न एयर डिफेंस सिस्‍टम डेवलप करने का ऐलान किया है. इस प्रोजेक्‍ट को गोल्‍डन डोम का नाम दिया गया है. अमेरिका ने चीन और रूस के संभावित खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया है. अमेरिका के पास पहले से ही THAAD और पैट्रियल जैसी वायु रक्षा प्रणाली उपलब्‍ध है. रूस ने भी S-400 और S-500 जैसा एयर डिफेंस सिस्‍टम डेवलप कर रखा है. बताया जाता है कि S-500 डिफेंस सिस्‍टम इतना ताकतवर है कि वह हाइपरसोनिक मिसाइल को भी डिटेक्‍ट और इंटरसेप्‍ट कर उसे तबाह कर सकता है. भारत एयर ड‍िफेंस सिस्‍टम के लिए मुख्‍य रूप से रूसी S-400 पर निर्भर है. हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्‍वदेशी आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम ने भी अपनी ताकत दिखाई थी और पाकिस्‍तान के ड्रोन और मिसाइल अटैक को पूरी तरह से नाकाम किया था. भारत अब इससे भी ताकतवर मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम डेवलप कर रहा है, जिससे पार पाना दुश्‍मनों के लिए कतई आसान नहीं होगा.

दरअसल, भारत के वेस्‍टर्न बॉर्डर पर पाकिस्‍तान और उत्‍तरी सीमा पर चीन स्थित है. चीन और आतंकवाद को स्‍टेट पॉलिसी के तौर पर इस्‍तेमाल करने वाले पाकिस्‍तान की दोस्‍ती से पूरी दुनिया वाकिफ है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने जिस तरह से पाकिस्‍तान के साथ इंडियन आर्म्‍ड फोर्सेज के क्रिटिकल एसेट्स का लाइव लोकेशन और मूवमेंट से जुड़ी जानाकरियां साझा की थीं, उससे दोनों सीमा पर मौजूद खतरे को बखूबी समझा जा सकता है. भारत इससे निपटने में जुटा है. आर्मी से लेकर नेवी और एयरफोर्स तक को अपग्रेड करने का काम फुल स्विंग में है. वायुसेना को और ताकतवर बनाने के लिए जहां स्‍वेदशी तकनीकों से लैसे फाइटर जेट डेवलप किए जा रहे हैं तो वहीं पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की मौजूदा जरूरतों को देखते हुए उसे खरीदने पर भी विचार किया जा रहा है. इसके अलावा अटैक मिसाइल यूनिट में नए और ज्‍यादा ताकतवर वेपन सिस्‍टम को लगातार शामिल किया जा रहा है. ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की ताकत पूरी दुनिया ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देखी. रेंज और पेलोड के मामले में इसे अब और पावरफुल बनाया जा रहा है. इसके अलावा भारत की सिक्‍योरिटी रिसर्च एजेंस‍ियां अल्‍ट्रा मॉडर्न हाइपरसोनिक मिसाइल मिसाइल डेवलप करने में भी जुटी है. इन सबके बीच हाई-स्‍पीड मिसाइल अटैक के बढ़ते खतरे से निपटने की भी व्‍यवस्‍था की जा रही है.
DRDO के एक्‍सपर्ट कटिंग एज रडार बनाने में जुटा है, जिससे एयर डिफेंस सिस्‍टम और मजबूत होगा. (फोटो: एपी/फाइल)

हाइपरसोनिक मिसाइल की धार होगी कुंद

डिफेंस सेक्‍टर से बड़ी खबर सामने आ रही है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) हाइपरसोनिक मिसाइल (मैक-5 या 6000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार) को नाकाम बनाने वाला सिस्‍टम डेवलप करने में जुटा है. DRDO का इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड रडार डेवलपमेंट इस्‍टेब्लिशमेंट (LRDE) हाइपरसोनिक मिसाइल अटैक से सुरक्षा के लिए नया सिस्‍टम डेवलप कर रहा है. यह डेवलपमेंट ऐसे समय सामने आया है, जब पाकिस्‍तान द्वारा चीन और तुर्की से मॉडर्न मिसाइल और फाइटर जेट खरीदने की तैयारी में जुटा है. ‘इंडिया डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, LRDE की ओर से विकसित किया जा रहा नया एडवांस्‍ड टारगेट डिटेक्‍शन रडार सिस्‍टम हाइपरसोनिक मिसाइल का पता लगाने के साथ ही उसे ट्रैक करने में भी सक्षम होगा. ऐसे में 6000 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे ज्‍यादा की रफ्तार वाली मिसाइलों की धार को आसमान में ही कुंद किया जा सकेगा.

रूस की S-500 एयर डिफेंस सिस्‍टम हाइपरसोनिक मिसाइल को डिटेक्‍ट, ट्रैक और इंटरसेप्‍ट करने में सक्षम है. (फोटो: एपी/फाइल)

जल्‍द होगा ट्रायल

LRDE की ओर से डेवलप किया जा रहा कटिंग एज रडार सिस्‍टम तूफानी रफ्तार से आने वाली मिसाइलों को आसानी से डिटेक्‍ट करने में कैपेबल होगा. हाइपरसोनिक मिसाइल का पता चलते ही उसे आसमान में ही तबाह करना काफी आसान हो जाएगा. नई टेक्‍नोलॉजी स्‍वार्डफिश लॉन्‍ग रेंज ट्रैकिंग रडार प्‍लेटफॉर्म पर भी काम कर सकेगा. बता दें कि स्‍वार्डफिश लॉन्ग रेंज ट्रैकिंग रडार (LRTR) एक भारतीय एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार है, जिसे भारतीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) कार्यक्रम के तहत विकसित किया गया है. इसे आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है. यह रडार इज़राइली ग्रीन पाइन रडार से प्रेरित है. यह छोटे टरगेट को लंबी दूरी से डिटेक्‍ट कर सकता है. रिपोर्ट की मानें तो निकट भविष्‍य में हाइपरसोनिक मिसाइल को डिटेक्‍ट करने वाले रडार सिस्‍टम का ट्रायल किया जा सकता है.

देसी S-500

दुनिया में कुछ देशों के पास एडवांस्‍ड एयर डिफेंस सिस्‍टम है. रूस के S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को दुनिया का सबसे बेहतरीन वायु सुरक्षा प्रणाली माना जाता है. S-500 की यूनिट (बैटरी) की कीमत इंटरनेशनल मार्केट में 2.5 बिलियन डॉलर (21 हजार करोड़ रुपये) है. S-500 डिफेंस सिस्‍टम हाइपरसोनिक मिसाइल को ट्रैक कर उसे तबाह करने के साथ ही ड्रोन, लो ऑर्बिट सैटेलाइट और स्‍पेस वेपन से होने वाले अटैक को बेअसर कर सकता है. यह सिस्‍टम 2000 किलोमीटर तक की बैलिस्टिक मिसइाल टारगेट को डिटेक्‍ट कर सकता है. इसके अलावा 600 किलोमीटर तक के रेंज तक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्‍ट करने में भी सक्षम है. अमेरिका का THAAD और इजरायल का आयर डोम सिस्‍टम S-500 से कहीं पीछे है. ये दोनों सिस्‍टम सुपरसोनिक मिसाइल का पता लगाकर उसे बेअसर कर सकता है. अब इस मामले में भारत का नया रडार सिस्‍टम अमेरिका और इजरायल से आगे निकल जाएगा.

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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