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RAFALE MRO IN HYDERABAD: जिस दिन से भारत ने आत्मनिर्भर बनने की राह चलना शुरू किया, दुनिया के तमाम देशों ने भारत का रुख करना शुरू कर दिया. विदेशों से हथियारों की खरीद कम करने के फैसले ने विदेशी कंपनियों को भारती…और पढ़ें
राफेल ढांचा भी भारत में तो MRO भी होगा यहीं
हाइलाइट्स
- राफेल के इंजन मेंटेनेंस अब हैदराबाद में होगा.
- राफेल का ढांचा भी हैदराबाद में बनेगा.
- हैदराबाद एयरोस्पेस इंडस्ट्री का हब बन रहा है.
RAFALE MRO IN HYDERABAD: हैदराबाद एयरोस्पेस इंडस्ट्री: राफेल को लेकर फ्रांस ने एक अच्छी खबर दी है. जो कभी नहीं हुआ, अब वो हो रहा है. दुनिया के सबसे घातक फाइटर जेट में से एक राफेल के इंजन के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल यानी MRO के लिए अब फ्रांस जाने की जरूरत नहीं. भारत में ही अब यह काम हो पाएगा. राफेल का इंजन M88 बनाने वाली कंपनी सॉफरान एयरक्राफ्ट इंजन ने इसका एलान किया है. यह पहली बार होगा जब इस तरह के इंजन रिपेयर या ओवरहॉलिंग की सुविधा फ्रांस से बाहर स्थापित की जा रही है. खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना के 36 राफेल और नौसेना के 26 राफेल M के इंजन से संबंधित किसी भी दिक्कत को यहीं दुरुस्त किया जा सकेगा. भारतीय राफेल ही नहीं बल्कि दूसरे देशों के राफेल जेट के इंजन को भी हैदराबाद में स्थापित होने वाली सुविधा में मेंटेनेंस किया जा सकेगा. राफेल डील में MRO फैसेलिटी तैयार करना भी शामिल था.
साल 2023-2024 में अमेरिका, फ्रांस और अर्मेनिया भारत से सबसे ज्यादा रक्षा उपकरण खरीदने वाले देश थे. हर देश भारत के साथ अपने डिफेंस रिश्तों को मजबूत करना चाहता है. इसी कड़ी में फ्रांस ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा. फ्रांस अब अपने राफेल फाइटर जेट के ढांचे के निर्माण के लिए भारत को चुना है. यह पहली बार है जब फ्रांस ने अपने इस प्रोजेक्ट के लिए किसी दूसरे देश की कंपनी के साथ हाथ मिलाया है. राफेल बनाने वाली फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम लिमिटेड के बीच यह करार हुआ है. कुल 4 प्रोडक्शन ट्रांसफर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए. इसकी फैसेलिटी हैदराबाद में स्थापित की जाएगी. साल 2028 तक असेंबली लाइन शुरू होने की उम्मीद है. हर महीने दो ढांचे इस सुविधा में तैयार किए जाएंगे. खास बात यह है कि इसमें न सिर्फ भारतीय राफेल बल्कि अन्य देशों के लिए भी तैयार होंगे. डसॉल्ट एविएशन ने अब तक 10,000 मिलिट्री और सिविल एयरक्राफ्ट का निर्माण किया है और तकरीबन 90 देशों को सप्लाई कर चुकी है.
अपाचे का ढांचा भी बनता है हैदराबाद में
दुनिया के सबसे घातक अटैक हेलिकॉप्टर अपाचे बेचता तो अमेरिका है, लेकिन उसका ढांचा हैदराबाद में ही बनता है. भारतीय कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम लिमिटेड बोइंग एरोस्पेस के साथ मिलकर इसका निर्माण करती है. यह सुविधा भी हैदराबाद में स्थापित है. इस सुविधा ने अब तक 250 से ज्यादा ढांचे डिलीवर किए हैं. साल 2024 की जनवरी में ही टाटा एडवांस्ड सिस्टम लिमिटेड और बोइंग के ज्वाइंट वेंचर टाटा बोइंग एरोस्पेस लिमिटेड ने सेना के पहले अपाचे का ढांचा सेना को हैंडओवर किया था. इसके बाद इसे अमेरिका के एरिजोना में बोइंग की सुविधा में भेजा गया जहां दुनिया की तमाम आधुनिक तकनीक और वेपन सिस्टम से लैस कर के थलसेना को सौंपा जाना है.

