
नई दिल्ली, 4 जून 2026।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को रक्षा सेवाओं की परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया। उन्होंने नई दिल्ली में चिकित्सा एवं निर्माण परियोजनाओं सहित रक्षा सेवाओं के लिए वित्तीय शक्तियों के संशोधित प्रत्यायोजन को जारी किया। इस नए आदेश के तहत फील्ड कमांडरों की वित्तीय सीमा में 100 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। कई अहम क्षेत्रों में तो यह बढ़ोतरी दोगुने से भी अधिक है।
रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इस फैसले से जमीनी स्तर पर तैनात कमांडरों की निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी। अब उन्हें छोटी-छोटी फाइलों के लिए दिल्ली का रुख नहीं करना पड़ेगा। इससे अनुबंधों को शीघ्रता से अंतिम रूप देने और महत्वपूर्ण परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
1.25 लाख करोड़ की खरीद को मिलेगी रफ्तार
संशोधित वित्तीय प्रत्यायोजन का सबसे बड़ा असर रक्षा खरीद पर पड़ेगा। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के बजटीय आवंटन के अनुसार, अब राजस्व मार्ग से 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद में मदद मिलेगी। पहले कम वित्तीय सीमा के कारण कई प्रस्तावों को मंजूरी के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। नई शक्तियों के बाद कमांडर स्तर पर ही बड़े फैसले लिए जा सकेंगे। इससे सेना की तत्काल जरूरतों को समय पर पूरा किया जा सकेगा।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगी मजबूती
सरकार का फोकस रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास यानी R&D के लिए आवंटित वित्तीय शक्तियों को दोगुना कर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय का स्पष्ट लक्ष्य है कि विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं यानी OEMs पर निर्भरता को कम किया जाए।
जब फील्ड कमांडरों के पास ज्यादा वित्तीय अधिकार होंगे, तो वे स्थानीय स्तर पर ही भारतीय स्टार्टअप्स और MSME से रक्षा उपकरण और तकनीक खरीद पाएंगे। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को सीधी गति मिलेगी। रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ेगी।
संयुक्त खरीद के लिए नए नियम, एक सेवा बनेगी लीड
संशोधित प्रत्यायोजन में संयुक्त सेवा खरीद को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। अब किसी भी वस्तु या सेवा की खरीद के लिए तीनों सेनाओं को अलग-अलग प्रक्रिया नहीं अपनानी पड़ेगी। इसके बजाय एक ‘अग्रणी सेवा’ को उच्चतर वित्तीय अधिकार दिए जाएंगे।
उदाहरण के लिए, अगर सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों को एक जैसे ड्रोन खरीदने हैं, तो कोई एक सेवा लीड लेकर पूरी खरीद कर सकती है। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि बड़े ऑर्डर के कारण कीमत भी कम आएगी। यह कदम तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए उठाया गया है।
तत्काल जरूरतों के लिए विशेष वित्तीय छूट
युद्ध या आपात स्थिति में सेना को तुरंत सामान की जरूरत पड़ती है। इसे देखते हुए सेना, वायु सेना और नौसेना कमांडरों को सौंपी गई विशेष वित्तीय शक्तियों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। तत्काल परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रदान की गई कुल वित्तीय सीमा में 100 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
इसके साथ ही वस्तुओं और सेवाओं की खरीद को विकेंद्रीकृत करने के लिए कई नए सक्षम वित्तीय प्राधिकरणों की स्थापना भी की गई है। इसका मतलब है कि अब ज्यादा अधिकारी अपने स्तर पर खरीद को मंजूरी दे सकेंगे।
5 साल बाद क्यों जरूरी हुआ संशोधन?
वित्तीय शक्तियों को अंतिम बार 2021 में अधिसूचित किया गया था। पिछले 5 सालों में सैन्य बलों की संख्या में विस्तार हुआ है। रक्षा बजट में भी लगातार वृद्धि हो रही है। साथ ही हथियारों और उपकरणों के रखरखाव का खर्च भी बढ़ा है।
पुरानी वित्तीय सीमाओं में इन जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा था। इसलिए यह संशोधन आवश्यक हो गया था। यह नया वित्तीय प्रत्यायोजन अक्टूबर 2025 में अधिसूचित संशोधित रक्षा खरीद नियमावली यानी DPM के साथ मिलकर काम करेगा। दोनों नियमों से त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलेगी और रक्षा बलों को समय पर संसाधन उपलब्ध होंगे।
इस मौके पर कौन-कौन था मौजूद
नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में देश का शीर्ष सैन्य नेतृत्व मौजूद रहा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेनाध्यक्ष एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और वायु सेना उप-प्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर शामिल हुए।
इनके अलावा रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, सचिव रक्षा उत्पादन श्री संजीव कुमार, सचिव पूर्व सैनिक कल्याण श्रीमती सुकृति लिखी, सचिव रक्षा वित्त श्री विश्वजीत सहाय और कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स श्री अनुग्रह नारायण दास भी उपस्थित थे।
Source: PIB Delhi

