इस मुलाकात की कोई पूर्व योजना नहीं थी. राष्ट्रपति भवन के स्टाफ में “हड़कंप” मच गया, क्योंकि अचानक किसी उच्च पदस्थ अधिकारी का आना सुरक्षा एवं प्रशासनिक मानदंडों के अनुरूप नहीं था.
कब से हो रहा पूर्व सूचना और सहमति लेने की परंपरा का पालन
क्या राष्ट्रपति से मिलने का प्रोटोकॉल होता है
अब जानते हैं कि राष्ट्रपति से मिलने का क्या कोई प्रोटोकॉल है. क्या राष्ट्रपति से मिलने के लिए उनसे पूर्व सहमति लेनी जरूरी है. संविधान में इस बारे में कुछ नहीं लिखा है लेकिन 73 सालों के संवैधानिक लोकतांत्रिक इतिहास में ये एक शिष्टाचार है कि जब भी राष्ट्रपति से मुलाकात करनी हो तो उन्हें पूर्व सूचना जरूर दे दी जाए. राष्ट्रपति भारत का सर्वोच्च संवैधानिक पद है. उनसे मिलने की प्रक्रिया औपचारिक, सुरक्षित और अत्यधिक नियोजित होती है.
पूर्व उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ बिना किसी पूर्व सूचना के 21 जुलाई को रात 9 बजे जब राष्ट्रपति से मिलने पहुंचे तो वहां के स्टाफ में हड़कंप मच गया
क्यों नहीं मिल सकते बिना शेड्यूल के?
राष्ट्रपति का पद राजनैतिक, सामाजिक और सांविधानिक दृष्टि से अत्यंत गरिमामय है, इसलिए सामान्य तौर पर कोई भी व्यक्ति अचानक मिलकर अपनी बात नहीं रख सकता.
किन लोगों को तुरंत मिलने की अनुमति मिल सकती है?
– मान्यता प्राप्त संगठनों, संस्थाओं या सामाजिक प्रतिनिधिमंडलों को समय लेकर मिलने की अनुमति दी जा सकती है.
– अतीत में कभी-कभी कोई विशेष सामाजिक कार्यकर्ता, पद्म पुरस्कार विजेता, या गंभीर जनहित याचिका लाने वाला व्यक्ति राष्ट्रपति से विशेष अनुमति के बाद मिल पाया है, लेकिन यह भी पूर्व प्रक्रिया और अनुमति के बाद ही हुआ.
प्रोटोकॉल ये कहता है कि राष्ट्रपति से मिलने के लिए पूर्व सूचना और उनकी सहमति जरूरी होती है. इस प्रोटोकॉल का पालन 1952 से ही होता रहा है.
क्या उपराष्ट्रपति अचानक मिल सकते हैं
हां. भारत के उपराष्ट्रपति सामान्यतौर पर राष्ट्रपति भवन में जाकर राष्ट्रपति से मिल सकते हैं, लेकिन इसमें भी सूचना देनी होती है, भले ही इसमें औपचारिक प्रक्रिया की जरूरत न हो.
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद हैं. उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं और राष्ट्राध्यक्ष से समय-समय पर विमर्श करना जरूरी हो सकता है. बस ये जरूर है कि इस मुलाकात में आमतौर पर लंबी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती. बस उन्हें राष्ट्रपति भवन को सूचना देनी होती हैं, ताकि सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं की जा सकें.
क्या बिल्कुल “बिना बताए” मिल सकते हैं?
क्या धनखड़ ने ये प्रोटोकॉल तोड़ा
अब तक कोई ऐसा पुख्ता सार्वजनिक दस्तावेज़ या आधिकारिक बयान नहीं है जो यह साफ़ तौर पर कहता हो कि जगदीप धनखड़ ने राष्ट्रपति भवन में जाकर प्रोटोकॉल तोड़ा. ये संकेत जरूर है कि उनके और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बीच इस तरह की मुलाकात से असहजता तो हुई.
क्या वह पहले भी राष्ट्रपति से मिलते रहे हैं
पहले उप राष्ट्रपति क्या करते थे
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जब उपराष्ट्रपति थे, वे राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से अक्सर मिलने जाते थे लेकिन उनके बीच भी समय तय करने की एक परंपरा रहती थी, बेशक तब वह राष्ट्रपति भवन के ही एक हिस्से में रहा करते थे
क्या कभी किसी प्रधानमंत्री, मंत्री या उपराष्ट्रपति ने ऐसा किया
क्या इमर्जेंसी लगाने से पहले इंदिरा ने मिलने का समय लिया था
हां, 1975 में इमरजेंसी लगाने से पहले हर बार जब भी वह उनसे मिलने गईं तब सूचित करके ही गईं. कोई दस्तावेज़ नहीं दिखाता कि इंदिरा गांधी बिना बताए राष्ट्रपति से मिली हों. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से कई बार मंत्री मिलने पहुंचे, पर सभी मुलाकातें शेड्यूल के अनुसार थीं.
क्या आम आदमी भी राष्ट्रपति से मिल सकता है
– कौन मिलना चाहता है? (नाम, पेशा, संगठन आदि)
– किसलिए मिलना चाहता है? (मुद्दा या उद्देश्य)
– कब और कितने लोगों के साथ मिलना है?
– यह पत्र आप डाक या ईमेल द्वारा राष्ट्रपति सचिवालय को भेज सकते हैं या ईमेल से अनुमति ले सकते हैं.
क्या किसी को भी मिल जाने की अनुमति मिल जाती है?
नहीं. राष्ट्रपति से आम नागरिक मिल सकते हैं, लेकिन यह पूर्व अनुमति, उचित कारण और सचिवालय की स्वीकृति पर निर्भर करता है.

